एक नायक का अंतर्द्वद्व




-अजय ब्रह्मात्‍मज
      फिल्‍मों का पत्रकार होने की एक मुश्किल यह रहती है कि हमें फिल्‍मी सितारों के बारे में चल रही अफवाहों और प्रचलित छवि के बारे में सभी की जिज्ञासाओं के जवाब देने पड़ते हैं। ये जिज्ञासाएं ज्‍यादातर आरोप और लांछन के रूप में होती हैं। मैंने महसूस किया है कि सभी इन कलाकारों के लिए तृतीय पुरूष वह का इस्‍तेमाल करते हैं। मुझे दिक्‍कत होती है। फिल्‍म कलाकरों के लिए आप संबोधन क्‍यों नहीं होता ? क्‍यों माना जाता है कि वे बदचलन,बददिमाग और बदमाश ही होते हैं ? पर्दे पर उन्‍हें देख कर हम भाव विभोर होते हैं। अपने आचार-व्‍यवहार में उनकी नकल करते हैं। मिलने या दिख जाने पर उल्‍लसित होते हैं। इन सभी के बावजूद कहीं न कहीं फिल्‍म कलाकारें के प्रति एक तिरस्‍कार और हेय भाव रहता है। यह हमारे समाज की विडंबना है कि हम जिन्‍हें चाहते हैं,उनसे घृणा भी करते हैं।
      बुधवार 6 मई को को सलमान खान को सेशन कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई और हाई कोर्ट ने चंद घंटों के अंदर ही उन्‍हें दो दिनों की अंतरिम जमानत दे दी। शुक्रवार को उनकी सजा निलंबित करने के साथ जमानत दे दी गई। खबर है कि वे शनिवार को कश्‍मीर पहुंच लाएंगे और अपनी निर्माणाधीन फिल्‍म बजरंगी भाईजान की शूटिंग में जुट जाएंगे। थोड़ी देर के लिए उनका कथित अपराध भूल जाएं और एक सामान्‍य व्‍यक्ति और कलाकार के तौर पर सलमान खान के बारे में सोचें तो हम अनुमान भी नहीं लगा सकते कि वे किस ऊहापोह से गुजर रहे होंगे। बजरंगी भाईजान देखते समय मैं यह जानने की कोशिश करूंगा कि 9-10 मई को उन्‍होंने किन दृश्‍यों की शूटिंग की थी। उन्‍हें देख कर दर्शकों की क्‍या प्रतिक्रिया रही। सार्वजनिक जिदगी जी रही हस्तियों के निजी संत्रास और एकाकीपर से हम अपरिचित ही रह जाते हैं। हम उनकी मुस्‍कान में ही डूबे रहते हैं। हिंदी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के उनके परिचित,सहयोगी और मित्र भी नहीं चाहते कि सलमान खान को सजा हो। पिछले दो दिनों में फिल्‍म बिरादरी के सदस्‍यों ने उनके घर जाकर हमदर्दी दिखाई। कुछ भी छिपा हुआ नहीं था। जो छिपा र‍हा,वह कभी सामने नहीं आएगा। सच है कि कुछ हस्तियों ने हमदर्दी जताने और दिखाने के बाद सलमान खान की हालत भी जाम टकराए और जश्‍न भी मनाया। बाहर से यह इंडस्‍ट्री एक परिवार की तरह दिखती है। वास्‍तविकता यही है कि किसी भी संयुक्‍त परिवार की तरह परस्‍पर मनमुटाव और रगड़ा होने पर भी मुश्किल और अवसाद की घडि़यों में एकजुटता दिखाई जा हमदर्दी और एकजुटता दिखी भी। कुछ लोग नाराज हैं कि सलमान खान अपराधी हैं और उनके प्रति सहानुभूति नही रखी जानी चाहिए। ऐसी आपत्तियों के समय भारतीय समाज में प्रचलित व्‍यवहार पर गौर करना चाहिए। क्‍या हम अपने परिवार में किसी के अपराधी निकल जाने पर हुई सजा के समय सहानुभूति नहीं जताते। फिल्‍म इंडस्‍ट्री एक बड़ा परिवार है। सलमान खान पॉपुलर स्‍टार हैं। उनके प्रति जाहिर हमदर्दी स्‍वाभाविक है।
      सलमान खान को मैं 20 सालो से जानता हूं। लगभग हर फिल्‍म की रिलीज के आसपास और अनेक इवेंट में उनसे मुलाकातें होती रही हैं। अब आरंभिक मुलाकातों की औपचारिकता भी नहीं रह गई है। वक्‍त-जरूरत पर उनसे यों भी मुलाकतें हो जाती हैं। पिछले कुछ सालों में बीइंग ह्यूमन के अधीन चैरिटी करते हुए सलमान खान को मैंने बदलते भी देखा है। आज के सलमान वही सलमान नहीं हैं,जो छवि अभी तक प्रचलित है। उनकी उच्‍छृंखलताएं खत्‍म हो गई हैं। निजी जीवन में उनकी चिंताओं का दायरा बड़ा हुआ है। जिम्‍मेदारियों का एहसास बढ़ा है। वे व्‍यक्ति और कलाकार के तौर पर समझदार हुए हैं। सलमान खान खुद मानते हैं कि वे उम्‍दा कलाकार नहीं हैं,लेकिन वे यह जानते हैं कि उनकी जबरदस्‍त फैन फॉलोइंग है। दर्शकों से उनका सीधा कनेक्‍ट हैं। उनकी फिल्‍मों के बारे में लिखते समय हमें एहसास रहता है कि हमारे रिव्‍यू से उनके दर्शकों को फर्क नहीं पड़ता। अगर आप पिछले 10-12 की उनकी फिल्‍मों पर गौर करें तो उनमें कई कॉमन पैटर्न दिखेंगे। उनकी फिल्‍मों का संसार फैमिली के मूल्‍यों को लेकर चलता है। उन फिल्‍मों का एक अलहदा वैल्‍यू सिस्‍टम है,जो उनके प्रशंसकों को भा गया है। सलमान उनसे अलग नहीं होना चाहते। उनके प्रशंसक उन्‍हें बार-बार उसी अवतार में देख कर प्रफुल्लित होते हैं।
      सलमान खान ने कभी स्‍पष्‍ट तौर पर न‍हीं कहा कि उन्‍हें अपनी गलतियों और भूलों का एहसास है। फिर भी उनके बात-व्‍यवहार से जाहिर होता है कि वें निरंतर प्रायश्चित के मूड में चले गए हैं। उनके मानस को पढ़ पाना इतना भी जटिल नहीं है। वे जरूरतमुदों की मदद करते ही हैं। यह उनका ओढ़ा हुआ काम नहीं है। हां,इस बीच अपने परमार्थ के कार्यों को उन्‍होंने व्‍यवस्ति करने के साथ संस्‍थागत रूप दे दिया है। वे स्‍वयं इन कार्यों में रुचि लेते हैं। एक बार उन्‍होंने एक सवाल के जवाब में बताया था कि मुझे सही-सही नहीं मालूम कि मैं कितना कमाता हूं और मेरे पैसे कहां खर्च होते हैं। उन्‍हें आने पिता पर भरोसा है। पिता सलीम खान की निगरानी में सारा हिसाब-किताब होता है। सलमान खान के पारिवारिक मित्रों के पास उनके अनेक किस्‍से हैं। उन किस्‍सों से सलमान खान की जो छवि बनती है,वह दोस्‍त,मददगार,वफादार,फैमिली पर्सन और पॉपुलर कलाकार की है।
      कोर्ट के फैसलों के बीच सलमान खान निश्चित ही अंतर्द्वंद्व से गुजर रहे होंगे। अनिश्चितता तो सामान्‍य व्‍यक्तियों की जिंदगी तबाह कर देती है। हमरी आह और वाह के बीच सलमान खान के सीने में चल रहे झंझावात उन्‍हें चैन और सुकून से सोने भी नहीं देते होंगे। अजीब सी बात है कि इस मामले में फंसी जिंदगियों से बड़ी चिंता यह देखी और बतायी जा रही है कि सलमान खान के जेल जाने से  फिल्‍म इंडस्‍ट्री को कितने करोड़ों का नुकसान होगा। सच कहूं तो यह चिंता व्‍यर्थ है। उनभोक्‍ता संस्‍कृति के इस दौर में हमारी संवेदनाएं और जिज्ञासाएं भी धन से जोड़ दी गई हैं। देखना यह चाहिए कि पूरे प्रकरण से गुजर रहे सलमान खान किस मनोदशा और स्थिति में हैं। इस मामले से जुड़े अन्‍य व्‍यक्तियों की जिंदगी कैसे प्रभावित हो रही है ?
            महेश भट्ट कहते हैं कि 50 के होने जा रहे सलमान खान के अंदर का बच्‍चा बड़ा ही नहीं होना चाहता। आज भले ही उसे मां की उंगलियां थाम कर चलने की जरूरत नहीं रह गई है,लेकिन भीतरी तौर पर वह मां-बाप के साए में ही सुरक्षा महसूस करता है। पर्दे पर नायक के तौर पर हर विपरीत स्थितियों का परास्‍त कर विजयी होने वाला सलमान खान निजी जिंदगी में भावनात्‍मक रुप से बहादुर नहीं है। अब वे बांद्रा का कैड ब्‍वॉय नहीं रह गए हैं। बीइंग ह्यूमन की गतिविविधयों ने उनकी इंसानियत बढ़ा दी है। वे ज्‍सादा संवेदनशील,भावुक और दयालु हो गए हैं। मुमकिन है कि वे अघोषित प्रायश्चित कर रहे हों। भारतीय संस्‍कृति में प्रायश्चय का प्रावधान है।

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