सिनेमालोक : यौन शोषण के और किस्से आएंगे सामने


सिनेमालोक
और किस्से आएंगे सामने
-अजय ब्रह्मात्मज
तनुश्री दत्ता-नाना पाटेकर प्रसंग के किसी निदान और निष्कर्ष पर पहुँचने के पहले विकास बहल का मामला सामने आ गया है. उसके बाद से कुछ और नाम आये हैं.कुछ ने तो आरोप लगने की आशंका में माफ़ी मंगनी शुरू कर दी है.अगर प्रशासन ने इस मामले को उचित तरीके से सुलझाया तो यकीं करें सकदों मामले उजागर होंगे.अनेक चेहरे बेनकाब होंगे.स्त्रियों को लेकर बढ़ रही बदनीयती की सडांध कम होगी. पिछले पच्चीस सालों के अनुभव पर यही कहना चाहूँगा की भारतीय समाज की तरह फिल्म जगत में भी औरतों के प्रति पुरुषों का रवैया सम्मानजनक नहीं है.उन्हें दफ्तर,स्टूडियो औए सेट पर तमाम सावधानी के बावजूद शर्मनाक और अपमानजनक स्थितियों से गुजरना पड़ता है.
सोमवार की ख़बरों के मुताबिक मुंबई पुलिस ने तनुश्री दत्ता के एफ़आईआर पर कार्रर्वाई शुरू कर दी है. गृह राज्य मंत्री दीपक केसरकर ने अस्वासन दिया था कि अगर तनुश्री दत्ता पुलिस में शिकायत दर्ज करती हैं तो मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होगी.उम्मीद की जाती है कि मुंबई पुलिस तत्परता से जांच कर जल्दी ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी.मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री में यौन शोसन और उत्पीडन की बातें और शिकायतें तो चलती रहती हैं,लेकिन पहली बार मामला इतना उभर कर सामने आया है.तनुश्री दत्त के मुताबिक 2008 में 26 मार्च को एक डांस सीक्वेंस की शूटिंग के समय नाना पाटेकर ने उनके साथ अवांछित दुर्व्यवहार किया.तनुश्री दत्त ने 2008 में भी इस मेल को उठाया था,लेकिन फिल्म बॉडी और पुलिस विभाग की तरफ से उन्हें राहत नहीं मिल सकी थीं.स्थितियां ऐसी बनीं कि तनुश्री दत्ता को फिल्म इंडस्ट्री ही छोड़नी पड़ी.दास सालों के बाद उन्होंने ने इस मेल को उठा तो उन्हें मीडिया और सोशल मीडिया का भरपूर सपोर्ट मिला.मिडिया  ने हर सेलेब्रिटी से सार्वजानिक मंच पर इस प्रसंग में उनसे सवाल पूछे.कुछ उदासीन रहे और सवाल को टाल गए,लेकिन ज्यादातर फ़िल्मी हस्तियों ने सपोर्ट किया.इस वजह से दबाव बढ़ा है.
इस बीच विकास बहल का मामला भी सामने आया है.विकास बहल फैंटम के चार निदेशकों में से एक थे.फिल्मों की यह प्रोडक्शन कंपनी हफिंगटन पोस्ट में आई खबर के बाद रातोंरात डिजोल्व कर दि गयी.अब इस कंपनी के निदेशक अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटवानी अफ़सोस जाहिर कर रहे हैं.अपनी भूल स्वीकार कर रहे हैं.अपने आप में यह स्वीकृति उनके अच्छे रवैये को व्यक्त करती है,लेकिन यह किसी परिणाम तक नहीं पहुँचती. इधर कंगना रनोट ने ‘क्वीन की शूटिंग के समय का हवाला देकर विशाल के व्यवहार पर सवाल खड़े करते हुए उसे यौन उत्पीडन से जोड़ दिया है.कुछ लोगों को लग रहा है कि अभी विकास बहल पर मौका देख कर चौतरफा आक्रमण हो रहा है.आरोप लग रहे हैं.इस तरह के विवादों में हमेशा कुछ लोग बेवजह ‘यह भी सच,वह भी सच’ का रवैया अपनाते हैं.वे न्याय की बात करते हुए भी अन्याय के खिलाफ खड़े नहीं मिलते.दूसरे दशकों से यही देखा जा रहा की हर विवाद पर कुछ दिनों के शोर-शराबे के बाद ये किस्से कानाफूसियों तक रह जाते हैं.
माना और बताया जा रहा है की हालीवुड के ‘मी टू के प्रभाव में भारत की हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में यह चेतना जगी और बढ़ी है.लड़कियां खुल कर उल्लेख कर रही हैं.भारतीय समाज महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने और उनकी बात सुनने के मामले में अभी बहुत पीछे है.सबसे पहले तो उनकी शिकायत को छुपाने-दबाने की बात की जाती है.बदनामी का खौफ दिखाया जाता है.कहीं न कहीं यह धरना घर कर चुकी है कि कोई भी परिणाम नहीं निकलता.हिंदी फिल्म इन्दुस्त्री में आवाज़ उठाने वाली लड़कियों को धीरे से किनारे कर दिया जाता है.उन्हें काम मिलना बंद हो जाता है.नतीजतन महिलाएं दशकों से ख़ामोशी की साजिश की शिकार होती रहती हैं.हर दशक में ऐसे किस्से मिलेंगे,जिनमें किसी निर्माता,निर्देशक या को-स्टार ने नयी अभिनेत्रियों के शोषण की कोशिश की है.कुछ अभिनेत्रियों ने अपनी आत्मकथाओं में ऐसे हादसों के संकेत दिए हैं.
वक़्त आ गया है कि हम ऐसी शिकायतों को गॉसिप से अलग कर के देखें.समाज में लड़कियों और फिल्मों में अभिनेत्रियों के प्रति अपना नजरिया बदलें.

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