फिल्‍म समीक्षा : थैंक यू

थैंक्यू: टाइमपास  कामेडीटाइमपास कामेडी

-अजय ब्रह्मात्‍मज

प्रियदर्शन और डेविड धवन की तरह अनीस बजमी का भी एक फार्मूला बन गया है। उनके पास कामेडी के दो-तीन समीकरण हैं। उन्हें ही वे भिन्न किरदारों और कलाकारों के साथ अलग-अलग फिल्मों में दिखाते रहते हैं। थैंक यू में अनीस बज्मी ने नो एंट्री की मौज-मस्ती और विवाहेतर संबंध के हास्यास्पद नतीजों को कनाडा की पृष्ठभूमि में रखा है। वहां फ्लर्ट स्वभाव के पतियों को रास्ते पर लाने के लिए सलमान खान थे। यहां अक्षय कुमार हैं। नो एंट्री में बिपाशा बसु का आयटम गीत था। थैंक यू में मलिका सहरावत रजिया की धुनों पर ठुमके लगाती दिखती हैं।

अनीस बज्मी की फिल्में टाइमपास होती हैं। डेविड धवन के विस्तार के रूप में उन्हें देखा जा सकता है। उनकी फिल्में लिखते-लिखते अनीस बज्मी निर्देशन में उतरे और फिर आजमाए फार्मूले से कमोबेश कामयाब होते रहे हैं। थैंक यू में तीन दोस्त हैं। उनकी फितरत में फ्लर्टिग है। मौका मिलते ही वे दूसरी लड़कियों के चक्कर में पड़ जाते हैं। अपनी बीवियों को दबा, समझा और बहकाकर उन्होंने अय्याशी के रास्ते खोज लिए हैं। बीवियों को शक होता है तो उन्हें रास्ते पर लाने के लिए वे मैरिज काउंसिलर की मदद लेती हैं। अक्षय कुमार यानी किसना एक का दोस्त, दूसरे का भाई और तीसरे का प्रेमी बन कर उन्हें रास्ते पर लाता है। बाद में एक छोटा सा भाषण भी दे देता है ताकि यह भ्रम बना रहे कि फिल्म में एक मैसेज भी है।

अनीस बज्मी ने अपने चहेते अभिनेता अक्षय कुमार को इस बार बॉबी देओल, सुनील शेट्टी और इरफान खान के साथ पेश किया है। साथ में सोनम कपूर, रिमी सेन और सेलिना जेटली हैं। तीनों हीरोइनों की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए अनीस ने उन्हें पर्दे पर अधिक समय नहीं दिया है। केवल सोनम कपूर को ज्यादा समय और फुटेज को मिला है, लेकिन वह निराश करती हैं। रिमी सेन अपने किरदार में फिट हैं।

सेलिना जेटली तो पलक झपकते ही पर्दे से गायब हो गई हैं। अनीस बज्मी की फिल्में मुख्य रूप से पुरुष किरदारों पर ही टिकी रहती है। उनमें औरतों को लेकर भद्दे मजाक रहते हैं। इस फिल्म में तो चार-चार हीरो थे। उनके बीच संतुलन बिठाते हुए अनीस हंसने-हंसाने के सीन गढ़ने में सफल रहे हैं। अक्षय कुमार एक अंतराल के बाद इस फिल्म में सहज प्रवाह में दिखे हैं। थैक यू को इरफान ने अपनी टाइमिंग और संजीदगी से निखार दिया है। सचमुच समर्थ अभिनेता साधारण फिल्मों को भी बेहतर बना देते हैं।

फिल्म के नाच-गानों में नवीनता नहीं है। प्यार दो, प्यार लो गीत के बोल तक ठीक से सुनाई नहीं पड़ते। प्रीतम को अपनी धुनों के साथ गायकों के स्पष्ट उच्चारण पर थोड़ा ध्यान देना चाहिए।

रेटिंग- **1/2 ढाई स्टार

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