बचकानी क्यों हो बच्चों की फिल्म- सत्‍यजित भटकल

-अजय ब्रह्मात्‍मज /रघुवेन्द्र सिंह

सत्यजित भटकल पेशेवर वकील थे। आमिर खान ने बचपन के अपने इस मित्र को लगान फिल्म की निर्माण टीम में शामिल किया और सत्यजित की सिनेमा से घनिष्ठता बढ़ती गई। सत्यजित ने लगान फिल्म की मेकिंग पर द स्पिरिट ऑफ लगान पुस्तक लिखी, जो बहुत सराही गई। दर्शील सफारी अभिनीत जोकोमोन सत्यजित भटकल की निर्देशक के तौर पर पहली कामर्शियल फिल्म है जिसमें कहानी है चाइल्ड सुपरहीरो की।

'जोकोमोन' फिल्म का बीज कैसे पड़ा?

इसका मुख्य किरदार कुणाल नाम का लड़का है, जिसे दर्शील सफारी प्ले कर रहे हैं। कुणाल अनाथ है। वह चाचा के पास रहता है। अपने स्वार्थ के लिए चाचा बड़े शहर ले जाकर छोड़ देते हैं। वह अकेला महसूस करता है। उसकी केयर करने वाला कोई नहीं है। उस परिस्थिति में वह अपनी स्ट्रेंथ को डिस्कवर करता है। किसी भी इंसान की कमजोरी उसकी लाइफ की सबसे बड़ी स्ट्रेंथ बन सकती है। इस विचार से बीज पड़ा कि क्या होगा, अगर वह लड़का अपनी कमजोरी को ताकत बना ले।

क्या हम इसे पूरी तरह से बाल फिल्म कह सकते हैं?

जी नहीं। पूरी तरह से भी नहीं और आधी तरह से भी नहीं। मुझे आपत्ति है बाल फिल्म कहने से। कुछ पुराने फिल्ममेकर्स को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर लोगों ने बाल फिल्म के नाम पर बचकानी फिल्में बनाई हैं। जो फिल्में एडल्ट देखते हैं, वह भी बहुत मेच्योर नहीं होतीं। वे बहुत ही बकवास और चाइल्डिश होती हैं। मैं देखता हूं कि अभी चाइल्ड फिल्म वह मानी जा रही है, जिसमें अश्लील गाना न हो, भयंकर वायलेंस न हो, गंदे किस्म का ह्यूंमर न हो। उस व्याख्या से मेरी फिल्म चिल्ड्रेन फिल्म है। दरअसल सबसे खास चीज होती है कि किसी फिल्म की एस्थेटिक क्या है? मेरी यह कोशिश रही है कि फिल्म का कंटेट चाइल्ड हो पर एस्थेटिक मेच्योर रहे। इस फिल्म का कंटेंट यूनिवर्सल ह्यूंमन वैल्यू पर है।

चिल्ड्रेन फिल्में बच्चों से जुड़े किसी गंभीर मुद्दे को डील करने के चक्कर में गंभीर हो जाती हैं या फिर बहुत ही हल्की-फुल्की बनाई जाती हैं। आपकी फिल्म इस मामले में कहां है?

हमारी इंडस्ट्री में मुश्किल से चिल्ड्रेन फिल्म बनती है। तीन-चार फिल्में बच्चों के लिए बनती हैं। मुझे जो चिल्ड्रेन फिल्म याद हैं वह मकड़ी, जजंतरम ममंतरम और ब्लू अंब्रेला हैं। हमारे यहां जनरल आडियंस के लिए जो फिल्में बनती हैं, उसे बच्चे भी देखते हैं। गजनी को ही ले लीजिए।

वजह क्या है बेहतर बाल फिल्में न बनने की?

उस बाजार को अभी एक्सप्लोर किया जाएगा। हॉलीवुड में ट्वेंटीएथ सेंचुरी फिल्म निर्माण कंपनी पर इतना कर्जा था कि वह डूबने वाली थी। तभी पांच मिलियन डॉलर की फिल्म होम अलोन रिलीज हुई। उसने तीन-चार सौ मिलियन डॉलर की कमाई की। उससे चिल्ड्रेन फिल्म के बारे में लोगों का नजरिया बदला। जोकोमोन नहीं तो कोई और फिल्म एक्सप्लोर करेगी इस जॉनर को। मार्केट है ऐसी फिल्म का।

आपकी 'चले चलो' डॉक्यूमेंट्री फिल्म 2002 में आई थी। पहली कामर्शियल फिल्म बनाने में इतना लंबा समय क्यों लगा?

मैंने टीवी के लिए बांबे लॉयर कार्यक्रम बनाया था। उसके बाद जोकोमोन की स्क्रिप्ट पूरी हुई। यह जरूर है कि यह फिल्म बनते-बनते टाइम लगा। मैंने 3-4 स्क्रिप्ट लिखीं। पता नहीं किसी कारण से यह स्क्रिप्ट निकल आई। मैं जहां भी गया इस स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाने के लिए लोग तैयार हो गए। मेरे पास च्वाइस थी कि किसके साथ इसे बनाऊं?

आपको अपने बचपन की कौन सी फिल्में पसंद हैं?

हमें फिल्में देखने नहीं दी जाती थीं। कहा जाता था कि वायलेंट हैं। मैंने फिल्में बहुत लेट देखना शुरू किया। मुझे याद है कि शोले देखकर मैं बहुत डर गया था, क्योंकि एक्सपोजर ही नहीं था। मैं और मेरा छोटा भाई थिएटर से भाग जाना चाहते थे। हम लोग नाटक बहुत देखते थे। हम बाल नाट्य देखते थे और उनमें एक्ट भी करते थे। अभी हाल में मेरी तीन-चार साल की बेटी कमरे में बैठकर फिल्म देख रही थी। मैंने देखा कि कोई एक्टर था, उसके चेहरे पर खून था बहुत। मैं परेशान हो गया। रिमोट ढूंढने लगा टीवी बंद करने के लिए। बेटी ने कहा कि पापा डरो मत, वह टोमैटो सॉस है!

बच्चों को फिल्म देखने देना चाहिए?

आप रोक नहीं सकते। बच्चों को च्वाइस देनी चाहिए।

दर्शील सफारी के साथ कैसा अनुभव रहा?

मैंने बहुत से एक्टर के साथ काम किया है। दर्शील बेस्ट एक्टर हैं। बहुत ही इंटेलीजेंट। मैंने उनके साथ बहुत एंज्वॉय किया। बहुत तेज बच्चा है। वह लाइफ में जो भी करेगा, उसमें सफल होगा। उसमें मेच्योरिटी है, लेकिन उसने अपना बचपना खोया नहीं है। दर्शील ने पूरी फिल्म अपने कंधों पर ढोयी है। वह सब कुछ अच्छा करता है। कॉमेडी, ड्रामा, एक्शन करता है। इसमें वह सुपरहीरो बना है!

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