खतरनाक खेल है एक्टर बनना: हरमन बवेजा

-अजय ब्रह्मात्मज
हैरी बवेजा के पुत्र हरमन अपनी पहली फिल्म के प्रदर्शन से पहले ही चर्चा में आ गए है। चर्चा इसलिए भी कि उनकी यह फिल्म भविष्य की प्रेम कहानी पर आधारित होगी। प्रस्तुत है हरमन से बातचीत के अंश
आपके बारे में सुनते आए हैं कि पहले आप प्रोडक्शन में जाने वाले थे। एक्टिंग में आने का कब और कैसे इरादा हुआ?
मैंने सबसे पहले होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की। दसवीं करके मैं स्वीटजरलैंड चला गया था। होटल मैंनेजमेंट सीखने। वहां पहले साल में सिलवर मेडलिस्ट रहा, लेकिन मुझे उस में मजा नहीं आया । मैं वापस आ गया, तब मैंने डैड से कहा कि डैड मुझे नहीं लगता है कि मुझे ये कंटीन्यू करना है। एक चीज में अगर मेरा दिल नहीं है तो मैं उसको क्यों करता रहूं? मुझे लगता है कि फिल्मों में मेरा मन लगता है। एक्िटग हो, डायरेक्शन हो, इसी फील्ड में कुछ करना है। उन्होंने कहा कि ठीक है। उन्होंने सबसे पहले असिस्टेंट डायरेक्टर बनाया और फिर मुझे सीधे एक प्रोडक्शन की जिम्मेदारी दे दी। एक छोटी सी फिल्म थी ये क्या हो रहा है? 2001 या 2002 में आई थी। चार नए लड़के थे और चार नई लड़कियां थी। पापा ने कहा कि ये पिक्चर तुझे बनानी है। हंसल मेहता आपके डायरेक्टर हैं। पिक्चर की फ‌र्स्ट कॉपी तक पापा एक दिन भी सेट पर नहीं आए। पापा को शायद यह भी पता नहीं था कि पिक्चर का बजट कितना है। पिक्चर बिकी कितने में?
कब सोचा कि फिल्म लव स्टोरी 2050 ही करनी है। स्क्रिप्ट आपने फायनल किया या डैड ने?
डैड का आइडिया था। उन्हीं का निर्णय था। हां, पापा ने मुझसे राय मागी थी। मैं अभी इस लायक नहीं हूं कि डैड को सुझाव दूं। हमलोग दो-तीन फिल्मों पर काम कर रहे थे। लव स्टोरी ही बनानी थी। फिर लगा कि टर्न, ट्विस्ट और ड्रामा तो हर लव स्टोरी में होता है। इसमें ऐसा क्या है, जो दुनिया ने नहीं देखा है। डैड के पास एक स्क्रिप्ट थी, वे घर चलाने और खुद को स्थापित करने की चिंता में उस फिल्म को नहीं बना सके थे। उन्होंने वह स्क्रिप्ट निकाली और कहा कि अपने बेटे के साथ इसे बनाऊंगा। उन्होंने तीन-चार साल पहले उस पर काम शुरू किया और आज वह इनती बड़ी फिल्म हो गयी।
क्या इस फिल्म का कोई रेफरेंस है, हम इसे किस प्रकार की फिल्म कह सकते हैं?
ऐसी कोई फिल्म आप ने देखी ही नहीं है। इसमें 2008 से 2050 तक की लव स्टोरी है। हॉलीवुड में भी ऐसी लव स्टोरी नहीं बनी है। बिल्कुल मौलिक आइडिया है। इसमें फ्लाइंग कार है। ढाई तीन सौ मंजिलों की बिल्डिंग है। रोबोट हैं। आप कहेंगे कि यह सब तो पहले देखा है। अब आप पीरियड फिल्मे देखेंगे तो घोड़े-हाथी देखेंगे ही। यह भी एक प्रकार की पीरियड फिल्म है। इसका पीरियड अतीत में नहीं, भविष्य में है।
स्पेशल इफेक्ट और एनीमेशन का इस्तेमाल हुआ होगा?
एनीमेशन नहीं। स्पेशल इफेक्ट है। फ्लोरा फाउंटेन, गेटवे ऑफ इंडिया, वीटी स्टेशन जैसी ऐतिहासिक इमारतें वैसी ही हैं, लेकिन उनके आसपास सबकुछ बदल गया है। इन सारी चीजों को तैयार करने में तीन साल लगे हैं। लव स्टोरी 2050 रेगुलर हिंदी फिल्म नहीं है।
बयालीस साल बाद इमोशन कितना बदलेगा?
वह बदलाव दिखाया है हमने। प्रियंका का एक गाना है हे यू लवर ब्वॉय, विल यू बी माई टॉय, खेलूं खिलौने से फिर तोड़ दूं, एक पल मिलूं, अगले पल छोड़ दूं.. प्यार तो कभी नहीं बदलेगा। देखा जाए तो हर चीज प्यार की वजह से ही बनती और चलती है।
आमतौर पर भारतीय अधिक भावनात्मक होते हैं। यहां तक कि उनकी भावनाओं से खेलकर मूर्ख भी बनाया जा सकता है। क्या 2050 के इमोशन कुछ अलग होंगे?
बिल्कुल, आज भी आप ऐसे लोगों से मिल सकते हैं, जो पचास साल पहले की भावनाओं और मूल्यों के साथ जी रहे हैं। आप कहते हैं न कि यार थोड़ा बदल जा, सयाने हो जा। वैसे लोग आप को कहते हैं कि तू बदल गया है। तेरे अंदर इमोशन नहीं रहा।
अपने किरदार और फिल्म के बारे में कितना बता सकते हैं?
मेरा नाम करण मल्होत्रा है। करण एक्सट्रीम स्पोर्ट्स में रुचि लेता है। उसे खतरों से लगाव है। रोलर कोस्टर पर वह उल्टा बैठ जाता है ताकि पिछली सीट वाली लड़की से बात कर सके। उसको यह डर नहीं है कि गिरेगा तो मरेगा। उसे जिंदगी से प्यार है, लेकिन मौत का डर नहीं है। मैंने इस फिल्म के लिए काफी ट्रेनिंग ली। लगता है कि मैं कैरेक्टर में थोड़ा ज्यादा ही घुस गया, इसलिए मुझे खतरनाक स्पोर्ट्स अच्छे लगने लगे हैं। लोग सावधान करते रहे कि तू खिलाड़ी नहीं, एक्टर है। थोड़ी सावधानी बरत और जान जोखिम में न डाल।
और प्रियंका चोपड़ा?
उनका रोल बिल्कुल अलग है। उन्होंने आज तक ऐसा किरदार नहीं निभाया। दर्शक इस फिल्म में प्रियंका को देख कर खुश होंगे।

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