फ़िल्म समीक्षा:गोलमाल रिट‌र्न्स


पिछली फिल्म की कामयाबी को रिपीट करने के लोभ से कम ही डायरेक्टर व प्रोड्यूसर बच पाते हैं। रोहित शेट्टी और अष्ट विनायक इस कोशिश में पिछली कामयाबी को बॉक्स ऑफिस पर भले ही दोहरा लें लेकिन फिल्म के तौर पर गोलमाल रिट‌र्न्स पहली गोलमाल से कमजोर है।
ऐसी फिल्मों की कोई कहानी नहीं होती। एक शक्की बीवी है और उसका शक दूर करने के लिए पति एक झूठ बोलता है। उस झूठ को लेकर प्रसंग जुड़ते हैं और कहानी आगे बढ़ती है। कहानी बढ़ने के साथ किरदार जुड़ते हैं और फिर फिल्म में लतीफे शामिल किए जाते हैं। कुछ दर्शकों को बेसिर-पैर की ऐसी फिल्म अच्छी लग सकती है लेकिन हिंदी की अच्छी कॉमेडी देखने वाले दर्शकों को गोलमाल रिट‌र्न्स खास नहीं लगेगी।
अजय देवगन संवादों के माध्यम से अपना ही मजाक उड़ाते हैं। तुषार कपूर गूंगे की भूमिका में दक्ष होते जा रहे हैं। मालूम नहीं एक कलाकार के तौर पर यह उनकी खूबी मानी जाएगी या कमी? फिल्म में अरशद वारसी की एनर्जी प्रभावित करती है। श्रेयस तलपड़े हर फिल्म में यह जरूर बता देते हैं कि वे अच्छे मिमिक्री आर्टिस्ट हैं। उन्हें इस लोभ से बचने की जरूरत है।
गानों के फिल्मांकन में रोहित ने अवश्य भव्यता रखी है और फैंटेसी का सुंदर इस्तेमाल किया है। कंप्यूटरजनित छवियां उनकी कल्पना को साकार करती हैं। रोहित को अगली बार समर्थ लेखकों के साथ काम करना चाहिए। उम्मीद है कि वे भविष्य में अपनी तकनीकी दक्षता का बेहतरीन इस्तेमाल करेंगे और बेहतरीन फिल्में देंगे।

मुख्य कलाकार : अजय देवगन, अरशद वारसी, सेलिना जेटली, अमृता अरोरा, तुषार कपूर, श्रेयश तलपड़े, करीना कपूर, अंजना सुखानी।
निर्देशक : रोहित शेट्टी
तकनीकी टीम : निर्माता- ढिलिन मेहता

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कमाल की समीक्षा

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