दरअसल:बन रही हैं डरावनी फिल्में

-अजय ब्रह्मात्मज

हालिया रिलीज भट्ट कैंप की मोहित सूरी निर्देशित फिल्म राज-द मिस्ट्री कंटीन्यूज को 2009 की पहली हिट फिल्म कही जा रही है। इस फिल्म ने इमरान हाशमी और कंगना रानावत के बाजार भाव बढ़ा दिए। भट्ट कैंप में खुशी की लहर है और सोनी बीएमजी भी मुनाफे में रही।
उल्लेखनीय है कि सांवरिया और चांदनी चौक टू चाइना में विदेशी प्रोडक्शन कंपनियों को नुकसान हुआ था। ट्रेड पंडित राज-द मिस्ट्री कंटीन्यूज की सफलता का श्रेय पुरानी राज को देते हैं। इसके अलावा, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में यह धारणा काफी मजबूत हो रही है कि डरावनी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस करती हैं।
सन 2008 में रामगोपाल वर्मा की फिल्म फूंक और विक्रम भट्ट की 1920 ने ठीकठाक कारोबार किया। इसके पहले रामू की भूत भी सफल रही, लेकिन उसकी कामयाबी से प्रेरित होकर बनी दूसरी डरावनी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लुढ़क गई। पिछले साल फूंक को पसंद करने के बाद विक्रम भट्ट आशंकित थे कि शायद दर्शकों को 1920 पसंद न आए। दरअसल, उन्हें यह लग रहा था कि कुछ ही हफ्तों के अंतराल पर आ रही 1920 को दर्शक नहीं मिलेंगे, लेकिन उनकी आशंका निराधार निकली। रजनीश दुग्गल और अदा शर्मा जैसे नए कलाकारों के बावजूद 1920 चली। इसकी सफलता ने विक्रम भट्ट से चिपकी फ्लॉप डायरेक्टर की बदनामी दूर की। इस फिल्म की सफलता से जोश में आए विक्रम भट्ट ने तत्काल नई फिल्म शापित की घोषणा कर दी। शापित के जरिए वे गायक उदित नारायण के बेटे आदित्य नारायण और नई अभिनेत्री श्वेता को लॉन्च कर रहे हैं।
विक्रम भट्ट ने शापित की शूटिंग आरंभ कर दी है। इन दिनों फिल्मिस्तान में एक बंगले का सेट लगा कर वे आदित्य और श्वेता के साथ इसकी शूटिंग कर रहे हैं। डरावनी फिल्मों के प्रति अपने आकर्षण और उसके बाजार के संदर्भ में विक्रम कहते हैं, मैं स्वयं डरपोक किस्म का व्यक्ति हूं, इसलिए मुझे बहुत डर लगता है। मैं अकेले में डरावने विचारों से घिरा रहता हूं और डरावनी कहानियां बुनता रहता हूं। फिल्में बना कर मैं अपने डर को अभिव्यक्ति देता हूं। रही दर्शकों की बात, तो मुझे लगता है कि डर के साथ जुड़ा रोमांच दर्शकों को आकर्षित करता है। डरने में भी एक आनंद है। बचपन में डरावनी कहानियां पढ़ते या सुनते समय आप दादी-नानी या मां-पिता को भींच लेते हैं, लेकिन पूरी कहानी सुने बगैर नहीं सोते! फिल्म देखते समय कुछ वैसा ही रोमांच होता है। शापित विक्रम की डरावनी फिल्मों की ट्रायलॉजी की तीसरी और आखिरी फिल्म होगी। उसके बाद वे नए सिरे से डरावनी फिल्में निर्देशित करेंगे।
डरावनी फिल्मों के प्रति दर्शकों के रुझान को देखते हुए परसेप्ट पिक्चर कंपनी ने डरावनी फिल्मों के निर्माण में एकमुश्त राशि निवेश करने का फैसला किया है। फिलहाल उन्होंने पांच फिल्मों की घोषणा की है। प्रियदर्शन के निर्देशन में गर्रर.. इस सीरीज की पहली फिल्म होगी। इसमें प्रियदर्शन एक शेर और उसके शिकार की खौफनाक कहानी चित्रित करेंगे। परसेप्ट पिक्चर कंपनी जल्दी ही 888, 13, मुंबई और वहम का निर्माण करेगी। शैलेन्द्र सिंह मानते हैं कि डरावनी फिल्मों का बाजार है। कम्प्यूटर तकनीक के विकास और स्पेशल इफेक्ट की संभावना से डरावनी फिल्मों में डर पैदा करना ज्यादा आसान हुआ है। उदाहरण के लिए प्रियदर्शन की फिल्म में शेर को एनिमेशन के जरिए तैयार किया जाएगा। फिल्मों के ट्रेड पंडित मानते हैं कि अगर आने वाली डरावनी फिल्में सफल हुई, तो हिंदी फिल्मों में फिर से सातवें दशक का वह दौर आ सकता है, जब बड़े फिल्मकार और स्टार्स भी डरावनी फिल्मों का हिस्सा बनते थे। डरावनी फिल्में मुख्यधारा की मनोरंजक फिल्में मानी जाती थीं।
याद करें, तो वो कौन थी, मेरा साया और मधुमती जैसी फिल्मों में हमने दिलीप कुमार, मनोज कुमार, साधना और वैजयंतीमाला जैसे सितारों को देखा है। मुमकिन है कि आज के पॉपुलर सितारे भी डरावनी फिल्मों की तरफ रुख करें!

Comments

222222222222 said…
जब कुछ पास नहीं होगा तब ऐसी ही फिल्में बनेंगी।

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