फिल्म समीक्षा : एंग्री इंडियन गॉडेसेस
दुनिया औरतों की -अजय ब्रह्मात्मज हिंदी फिल्मों में पुरुष किरदारों के भाईचारे और दोस्ती पर फिल्में बनती रही हैं। यह एक मनोरंजक विधा(जोनर) है। महिला किरदारों के बहनापा और दोस्ती की बहुत कम फिल्में हैं। इस लिहाज से पैन नलिन की फिल्म ‘ एंग्री इंडियन गॉडेसेस ’ एक अच्छी कोशिश है। इस फिल्म में सात महिला किरदार हैं। उनकी पृष्ठभूमि अलग और विरोधी तक हैं। कॉलेज में कभी साथ रहीं लड़कियां गोवा में एकत्रित होती हैं। उनमें से एक की शादी होने वाली है। बाकी लड़कियों में से कुछ की शादी हो चुकी है और कुछ अभी तक करिअर और जिंदगी की जद्दोजहद में फंसी हैं। पैन नलिन ने उनके इस मिलन में उनकी जिंदगी के खालीपन,शिकायतों और उम्मीदों को रखने की कोशिश की है। फिल्म की शुरुआत रोचक है। आरंभिक मोटाज में हम सातों लड़कियों की जिंदगी की झलक पाते हैं। वे सभी जूझ रही हैं। उन्हें इस समाज में सामंजस्य बिठाने में दिक्कतें हो रही हैं,क्योंकि पुरुष प्रधान समाज उनकी इच्छाओं को कुचल देना चाहता है। तरजीह नहीं देता। फ्रीडा अपनी दोस्तों सुरंजना,जोअना,नरगिस,मधुरिता औ...

Comments
Agli baar kab milwa rahe ho????
लेकिन कभी जाली के बीच लिखे दिल्ली-6 नाम पर नज़र डालियेगा, ये आपको अंग्रेजी में मिलेगा, उर्दू में भी मिल जायेगा, लेकिन कभी नक्काशी के बीच इस नाम को देवनागरी हिन्दी में खोजने की कोशिश कीजियेगा.
मैंने भी की, लेकिन ये हर जगह उर्दू और अंग्रेजी में ही मिले.
अगर आप विदेशी फिल्में देखना पसंद करते हैं और स्टीफन स्पीलबर्ग (जुरासिक पार्क वाले) की 'अमिस्ताद'देखी हो तो याद करें, उसमें शुरुआत के कोई 15 मिनट तक अफ्रीका के आदिवासियों की भाषा में ही विचार-विमर्ष चलता है, जिसके सब-टाइटल्स तक नहीं दिए गए हैं। क्योंकि वहां भाषा के शब्दों को समझना उतना महत्वपूर्ण नहीं है।
स्लमडॉग मिलियनेयर को ही लें, इंग्लैंड की, इंग्लिश फिल्म में करीब आधी बातचीत, गाली आदि हिंदी-मुंबइया हिंदी में है, जिसको समझने और पुरस्कार के लिए चुनने में हॉलीवुडी ज्यूरी को कोई दिक्कत नहीं हुई!
कल ही हमने delhi 6 देखी है । और पसंद भी आई ।
मैं खंभों पर लगे पोस्टरों के विज्ञापन की बात कर रहा हुं. इनमें अंग्रेजी और उर्दू के विज्ञापन है लेकिन हिन्दी में कतई नहीं है,
स्पीलवर्ग की किस अंग्रेजी पिक्चर के पोस्टर अंग्रेजी में नहीं है? स्लमडॉग मिलियोनेर केर अंग्रेजी संस्करण के पोस्टर क्या अंग्रेजी में नहीं हैं? फिर हिन्दी भाषा के नाम पर अपने पेट में निवाले गटकने वाले इन फिल्म निर्माताओं को हिन्दी से परहेज क्यों? कौन से कारण है जो इनकी हिन्दी फिल्म के नाम अंग्रेजी और उर्दू में देने पर मज़बूर करते हैं?