फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो

-अजय ब्रह्मात्‍मज

फर्स्‍ट लुक और प्रोमो....आजकल इसे एक इवेंट का रूप दे दिया जाता है। निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्मों का फ‌र्स्ट लुक जारी करने के लिए किसी होटल या थिएटर में मीडिया को आमंत्रित करते हैं और फिर विभिन्न माध्यमों से फिल्म की चर्चा आरंभ होती है। छिटपुट रूप से ऐसी कोशिशें काफी सालों से की जा रही थीं, लेकिन आमिर खान ने गजनी की रिलीज के पहले इसका प्रोमो मीडिया के साथ शेयर किया था। साथ ही अपने विशेष लुक को देश के प्रमुख अखबारों के जरिए दर्शकों तक पहुंचाया था। तब से यह जोरदार तरीके से इंडिपेंडेंट इवेंट के तौर पर प्रचलित हुआ। फ‌र्स्ट लुक जारी करने का इवेंट अब कई स्तरों और रूपों में शुरू हो चुका है। कुछ निर्माता-निर्देशक सोशल मीडिया नेटवर्क का उपयोग कर रहे हैं। फ‌र्स्ट लुक प्रकट होते ही यह वायरस की तरह फैलता है। इसी से दर्शकों की पहली जिज्ञासा बनती है।

याद करें तो पहले पत्र-पत्रिकाओं में तस्वीरें और थिएटर में ट्रेलर चलते थे। पत्र-पत्रिकाओं में निर्देशक और फिल्म के प्रमुख स्टार्स के इंटरव्यू के साथ छपी तस्वीरों से दर्शकों का कयास आरंभ होता है। यहीं से संबंधित फिल्म के दर्शक बनने शुरू हो जाते हैं। कुछ पत्र-पत्रिकाओं में सचित्र फीचर छपते थे। किसी भी फिल्म के प्रति बनी जिज्ञासा का अध्ययन करें तो सबसे पहले घोषणा, फिर कलाकारों का चयन, निष्कासन, फेरबदल, मुहूर्त, शूटिंग की छिटपुट खबरें, सेट पर रोमांस, तनाव और झगड़ों की खबरें, पोस्ट-प्रोडक्शन और डबिंग की सूचनाएं, रिलीज की तारीख की घोषणा और आखिर में फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो। जरूरी नहीं कि हर फिल्म के प्रचार अभियान में यही क्रम रखा जाए। फिर भी सारी फिल्में घोषणा से प्रदर्शक के बीच इन पड़ावों से गुजर कर ही दर्शकों तक पहुंचती हैं। दर्शक इस दरम्यान अपना मन बनाते रहते हैं। आदतन पहले दिन पहले शो के दर्शकों की बात छोड़ दें तो ज्यादातर दर्शक फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो के आधार पर फिल्म देखने या नहीं देखने का फैसला करते हैं। रिलीज के बाद अखबारों और टीवी चैनलों के रिव्यू भी कई बार दर्शकों की हां या ना को बदलते हैं। कई बार फिल्म की हवा बन जाती है तो दर्शक उमड़ पड़ते हैं।

चूंकि दर्शकों को रिझाने और थिएटर में लाने के लिए फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो निहायत जरूरी हो गए हैं। इसलिए अब उनके विशेषज्ञ भी सामने आ गए हैं। फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो के लिए निर्माता-निर्देशक उनकी मदद लेते हैं। पब्लिसिटी डिजाइनर और प्रोमो स्पेश्लिस्ट के तौर पर मशहूर ये लोग इस फन में माहिर होते हैं। निर्देशक कई बार प्रोमो विशेषज्ञों के साथ बैठकर फिल्म के डिफरेंट प्रोमो तैयार करते हैं। कई अवसरों पर देखा गया है कि निर्माता प्रोमो के निर्माण में निर्देशक की मदद भी नहीं लेता। वह अपनी फिल्म के हित में दर्शकों को छलता है। इन दिनों दर्शकों को धोखा देने या बहकाने का सिलसिला बढ़ गया है। अक्सर प्रोमो आकर्षक और लुभावना होता है, लेकिन फिल्म घिसी-पिटी और बोरिंग निकलती है।

फिल्मों के विषय और स्टार वैल्यू के आधार पर ही फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो तैयार किए जाते हैं। आमतौर पर स्टार, फिल्म का विषय और फिल्म की खासियत को ध्यान में रखा जाता है। कोशिश रहती है कि दर्शकों को कुछ नया दिखे। फिल्म के स्टार भी फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो के कॉन्सेप्ट और निर्माण में बराबर का सहयोग देते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में तीनों खान खुद तय करते हैं कि उनकी फिल्मों का फ‌र्स्ट लुक कैसा होगा और कौन सा प्रोमो कब चलाया जाएगा? निर्माता के निवेश से अधिक बड़ा दांव उनके स्टारडम का रहता है। वे नहीं चाहते कि कोई कसर रह जाए और एक भी दर्शक-प्रशंसक गुमराह हो।

फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो ही दर्शकों को फिल्म देखने का पहला निमंत्रण देते हैं। फिल्म इंडस्ट्री में कहा जाता है कि दर्शक फ‌र्स्ट लुक और प्रोमो से ही सूंघ लेते हैं। उन पर आक्रामक प्रचार का भी असर नहीं होता। वे रिलीज के पहले ही तय कर चुके होते हैं कि फिल्म देखनी है या नहीं देखनी है? फिर भी रिझाने-लुभाने का सिलसिला जारी रहता है।

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