जार्डन को जीने की खुशी से मस्‍त रण्‍बीर कपूर

जे जे खुश हुआ-अजय ब्रह्मात्‍मज

अमूमन फिल्म रिलीज होने के बाद न तो डायरेक्टर किसी से मिलते हैं और न ही ऐक्टर.., लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ। रॉकस्टार की रिलीज के बाद जेजे यानी जॉर्डन यानी रणबीर कपूर लोगों से मिले। फिल्म की कामयाबी और चर्चा से वे खुश थे। उन्होंने फिल्म की मेकिंग, किरदार, एक्टिंग और इससे संबंधित अनेक मुद्दों पर बातें कीं। बर्फी की शूटिंग के लिए ऊटी निकलने से पहले बांद्रा स्थित अपने बंगले कृष्णराज में हुई मुलाकात में वे अच्छे नंबरों से पास हुए बच्चे की तरह खुश थे। प्रस्तुत हैं उनके ही शब्दों में उनकी बातें..

फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले के छह महीने हमने और इम्तियाज ने साथ बिताए थे। उस किरदार को समझना बहुत जरूरी था। बॉडी लैंग्वेज और फिजिकल अंदाज तो आ जाएगा। खास कपड़े पहनना, बालों को लंबा करना, दाढ़ी बढ़ाना.. ये सब बड़ी बातें नहीं हैं। किसी किरदार को समझने की एक आंतरिक प्रक्रिया होती है। जॉर्डन की म्यूजिकल क्वालिटी को समझना था। बात करना और चलना भी आ गया था, लेकिन वह अंदर से कैसे सोचता है? एक दो दिनों की शूटिंग के बाद समझ में आ गया। समझ में आने के बाद हम किरदार के साथ एकाकार हो जाते हैं। उसके बाद तो मुश्किल या आसान सीन होते हैं। अच्छे या बुरे दिन होते हैं।

फिल्म जिस क्रम में दिखाई देती है, जरूरी नहीं कि उसी क्रम में शूटिंग हुई हो। हमने लंबे बाल और दाढ़ी के दृश्य पहले किए थे। जनार्दन जाखड़ में मासूमियत है तो जॉर्डन में नाराजगी है। मैं अंदर से नाराज व्यक्ति नहीं हूं और न मुझमें जॉर्डन जैसी इंटेनसिटी है। इस किरदार के जरिए मुझे मौका मिला था यह जाहिर करने का फिल्म में सड्डा हक.. गाने के बाद के फेज में इम्तियाज जो कुछ कहना चाह रहे थे, वह व्यक्त हुआ है। अपने आसपास के समाज के प्रति गुस्सा, पाखंड और दोगलेपन से नाराजगी.. यों समझें कि किसी ने प्लग निकाल दिया हो, फिर भी करंट मौजूद है। जॉर्डन को पता ही नहीं है कि यह सब हीर की वजह से हो रहा है। जॉर्डन वास्तव में एक जीनियस है। आपने किसी जीनियस को करीब से देखा है। वे घबराए और अनिश्चित रहते हैं। इम्तियाज जीनियस हैं। वे जो महसूस कर रहे थे, उसे ही किरदारों के जरिए फिल्म में सजा रहे थे। फिल्म के शुरू में कॉलेज कैंटीन के सीन में खूब मजा आया। पहली बार मुझे किसी भारतीय कॉलेज-यूनिवर्सिटी में जाने और बैठने का मौका मिला। वहां का माहौल और खुशबू.. हॉस्टल देखे। कपड़े-बातचीत.., बिल्कुल अलग दुनिया थी। मैंने न्यूयॉर्क में पढ़ाई की है। यहां के बारे में नहीं जानता था। कैंटीन के सीन में सब रीअल स्टूडेंट्स थे। रीअल लोगों के होने से एक-एक आर्गेनिक फीलिंग आती है। आसपास के सारे लोग रीअल थे, तो मैं भी रीअल हो गया। मेरे अंदर अचानक परिवर्तन हुआ। परफॉर्म करना भूल गया। भूल गया कि मैं ऐक्टर हूं। मैं अपनी उम्र और स्टूडेंट की तरह बातें करने लगा।

इस फिल्म के कुछ दृश्यों में अगर लोगों को राजकपूर की झलक मिली या मैं पापा जैसा लगा, तो वह अनायास था। मैंने किसी की नकल करने की कोशिश नहीं की है। मैंने दादा राजकपूर और पापा की सारी फिल्में देखी हैं। मैं उसी परिवार का सदस्य हूं, तो यह स्वाभाविक है। आप अभिषेक बच्चन की फिल्मों में गौर करेंगे तो कई एंगल और दृश्यों में वे अमिताभ बच्चन की तरह दिखते हैं। अगर मेरे काम में पापा और दादा जी की झलक मिल रही है तो मैं तो इसे शिकायत नहीं, बल्कि कंप्लीमेंट की तरह लूंगा। वैसे मैं बता दूं कि पापा इतने ओरिजनल हैं कि उनकी नकल नहीं हो पाती। जॉनी लीवर स्टेज पर सभी स्टारों की मिमिक्री करते हैं। वे कहते हैं कि ऋषि जी आप की नकल ही नहीं हो पाती। इसकी वजह यही है कि पापा की ऐसी स्टाइल या मैनरिज्म नहीं है।

पापा से प्रेरणा लेकर मैंने फिल्म के गानों पर खास ध्यान दिया। इसे आप शम्मी कपूर जी की प्रेरणा भी कह सकते हैं। वे मोहम्मद रफी के साथ रिकार्डिग में बैठा करते थे। फिल्म में मैं एक संगीतकार हूं, इसलिए पर्दे पर गाते हुए मुझे वास्तविक दिखना चाहिए था। गिटार बनाना भी सही लगे। इस बार मैंने ट्रेनिंग ली है। हर गाने की रिकार्डिग के समय स्टूडियो गया। गाते समय चेहरे के भाव और हाव-भाव पर ध्यान दिया। इस फिल्म के गाने चालू किस्म के नहीं हैं। शुरू में बोल के अर्थ समझ में नहीं आए। इसमें पोएट्री है और अर्थो में गहराई है। इम्तियाज ने मुझे हर शब्द और गाने का मतलब समझाया। जॉर्डन का नजरिया गानों के बोल से समझ में आता है।

जॉर्डन की भूमिका लिए मुझे ढेरों बधाइयां मिलीं। आशीर्वाद मिले, लेकिन दादी का दिया तोहफा तो हमेशा की चीज हो गई। उन्हें बड़े दादा पृथ्वीराज कपूर ने सोने का मेडल किया था। दादी ने मुझे वह भेंट किया और आशीर्वाद दिया कि तुम कपूर परिवार की परंपरा आगे बढ़ा रहे हो। मैं अपने बेटे या पोते-पोतियों में किसी को इसे भेंट करूंगा। सचमुच मैं बहुत खुश हूं और नए जोश और जिम्मेदारी के साथ मेहनत कर रहा हूं।

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