दरअसल : ईद ने पूरी की उम्मीद


-अजय ब्रह्मात्मज

    इस साल भी सलमान खान को दर्शकों ने ईदी दी। उनकी फिल्म ‘किक’ को अपेक्षा के मुताबिक पर्याप्त दर्शक मिले। इस फिल्म के साथ सलमान खान सबसे आगे निकल गए हैं। ‘किक’ 100 करोड़ क्लब में आने वाली उनकी सातवीं फिल्म है। ‘दबंग’,‘दबंग 2’,‘एक था टाइगर’,‘बॉडीगार्ड’,‘रेडी’,‘जय हो’ और अब ‘किक’ की कामयाबी ने सलमान खान को अलग और ऊंचे मुकाम पर पहुंचा दिया है। हालांकि सबसे ज्यादा बिजनेस करने का रिकार्ड अब ‘धूम 3’ के साथ है,लेकिन सलमान ने संख्या के लिहाज से बाकी दोनों खानों (आमिर और शाहरुख) को पीछे छोड़ दिया है। शाहरुख खान 4 और आमिर खान 3 100 करोड़ी फिल्मों के साथ उनसे पीछे हैं। सलमान खान ने वफादार प्रशंसकों की वजह से यह बढ़त हासिल की है। माना जाता है कि उनकी ‘जय हो’ फ्लाप फिल्म है,जबकि उसका भी कारोबार 116 करोड़ रहा। वह 100 करोड़ क्लब में 14 वें स्थान पर है। यह लगभग वही स्थिति है,जब अमिताभ बच्चन की फ्लॉप फिल्में भी दूसरे स्टारों की हिट फिल्मों से ज्यादा बिजनेस करती थीं।
    पिछले कुछ सालों से सलमान खान की एक फिल्म ईद के मौके पर जरूर रिलीज होती है। ट्रेड पंडित मानते हैं कि सलमान खान के प्रशंसकों में भारी संख्या मुसलमान दर्शकों की है। यह समाजशास्त्रीय विश्लेषण का विषय हो सकता है। पिछली बार ‘जय हो’ के ज्यादा नहीं चलने पर ट्रेड पंडितों ने कहा था कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ पतंग उड़ाने से उनके मुसलमान दर्शक नाराज हो गए।,इसलिए वे फिल्म देखने नहीं आए। इस तर्क का ठोस आधार नहीं है,फिर भी सभी मानते हैं कि मुसलमान दर्शकों के बीच वे शाहरुख और आमिर खान से ज्यादा लोकप्रिय हैं। उन्हें भाई,सल्लू मियां और भाईजान संबोधनों से पुकारा जाता है। ठोस अध्ययन और तथ्य आने के पहले यह सच दिख रहा है कि ईद के मौके पर आई सलमान खान की फिल्में अपेक्षाकृत ज्यादा व्यापार करती हैं। ‘किक’ की कामयाबी ने भी इस पर मोहर लगाई है।
    क्या है सलमान की सफलता का राज? सलमान खान की फिल्में सीधे-सादे विषयों पर होती हैं। उच्छृंखल और शरारती स्वभाव का उनका किरदार नेकदिल होता है। उसकी छेड़खानियों में विनोद का पुट रहता है। कई बार खुद को बेवकूफी की हद तक ले जाता यह किरदार पारिवारिक मूल्यों में यकीन रखता है। बहन और माता-पिता से उसके भावुक संबंध रहते हैं। सलमान खान की फिल्मों की नायिकाओं को आखिरकार घरेलू और रुढि़वादी सांचे में ढलना पड़ता है। रजनीकांत की तरह हर फिल्म में उनकी खास स्टाइल होती है। ‘किक’ में उनकी विशेषताओं और लक्षणों का एक दृश्य था। उनके डांसिंग स्टेप सरल और नकल करने में आसान होते हैं। इनके अलावा सलमान खान अपनी फिल्मों में सहयोगी किरदारों से अधिक दर्शकों से मुखातिब होते हैं। साफ दिखता है कि वे दर्शकों से अपनी हरकतों और शरारतों की स्वीकृति चाहते हैं। सलमान खान देश के अधिकांश मध्यवर्गीय और निम्नमध्यवर्गीय युवकों की सुषुप्त इच्छाओं के नायक हो गए हैं। इन युवकों की परवरिश में हिंदी फिल्मों करी भूमिका शास्त्रीय मिथकों जैसी रही है। इधर सलमान खान ने ‘बीइंग ह्यूमन’ छवि को मजबूत और रोशन किया है। इसके असर से उनकी लोकप्रियता बढ़ी है।
    एक बातचीत में सलमान खान ने स्पष्ट तरीके से समझाया था कि उनकी फिल्में देखते समय दर्शक फिल्म के किरदार प्रेम,राधे या देवी को नहीं देख रहा होता है। वह उन सभी में मेरी उसी छवि और जानकारी को देख रहा होता है,जो विभिन्न संचार माध्यमों से उस तक पहुंचती हैं। यह बात सभी लोकप्रिय सितारों के लिए सटीक है,क्योंकि हम हिंदी फिल्मों के स्टारों को उनकी इमेज से बाहर देखना और रखना नहीं चाहते। यही कारण है कि दो दशकों से वे पर्दे पर थोड़ी फेरबदल के साथ यथावत दिखते रहते हैं।
   

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