लडते रहेंगे तो जीत मिलेगी-अक्षय कुमार


-अजय ब्रह्मात्‍मज 
अक्षय कुमार की फिल्‍में लगातार प्रदर्शित हो रही हैं। खान त्रयी के अलावा चंद पाॅपुलर हीरो में उनका नाम शामिल है। अभिनय के लिहाज से उनकी यादगार फिल्‍में कम हैं,लेकिन आम दर्शकों के मनोरंजन में वे माहिर हैं। एक्‍शन फिल्‍मों के इस दौर के पहले ही वे एक्‍शन कुमार के नाम से मशहूर रहे हैं। पिता से उनका खास लगाव है। यहां वे 'बॉस' के बारे में बता रहे हैं। फिल्‍म कल रिलीज हो रही है।
- ‘बॉस’ का विचार कहां से आया?
0 हमने एक मलयाली फिल्म ‘पोकिरी राजा’ देखी थी। वह मुझे बहुत अच्छी लगी थी। मैंने तभी तय कर लिया था कि हिंदी में इसकी रीमेक बनाऊंगा। अश्विन वर्दे के साथ मिलकर मैंने इस फिल्म की प्लानिंग की। निर्देशन के लिए टोनी (एंथनी डिसूजा) को चुना। यह एक परिवार के पिता और दो बेटों की कहानी है। दोनों बेटों के साथ उनके अलग रिश्ते और रवैए हैं।
- ‘पोकिरी राजा’ में ऐसी क्या खास बात लगी थी कि आपने रीमेक के बारे में सोचा?
0 मुझे बाप-बेटे की कहानी हमेशा प्रभावित करती है। मैंने खुद ऐसी कई फिल्मों में काम किया है। कुछ निर्माण भी किया है। ‘वक्त’, ‘एक रिश्ता’ और ‘जानवर’ में बाप-बेटे की कहानियां थी। इस रिश्ते पर यह मेरी चौथी फिल्म होगी। मैं इस रिश्ते को बहुत ऊंचा मानता हूं। मैंने अपने पिता के साथ बहुत कुछ शेयर किया था। आज उनकी कमी महसूस करता हूं। मैंने अभी तक फिल्मों में पिता के बारे में गाना नहीं सुना है। ‘बॉस’ में पिता को समर्पित एक गाना है।
- हिंदी में बाप-बेटों पर बनी फिल्मों में मुख्य रूप से तनाव और संघर्ष ही रहता है?
0 उस संघर्ष और तनाव के पीछे उनका प्रेम ही होता है। पिता को दूसरे रूप में कम ही दिखाया गया है। मां, बहन, भाई, दोस्त सभी पर भावनात्मक फिल्में बनी हैं। एक पिता को छोड़ दिया जाता है। परिवारों में भी पिता चुप ही रहता है। ज्यादातर उसकी भूमिका प्रोवाइडर की होती है। इसमें मिथुन चक्रवर्ती मेरे पिता हैं और डैनी डेंजोग्पा पिता जैसे हैं। उन दोनों के बीच मेरी कशमकश चलती है।
- इस फिल्म के लिए निर्देशन की जिम्मेदारी टोनी को ही क्यों दी? उनकी पिछली फिल्म ‘ब्लू’ थी, जो कि  ़ ़ ़
0 (सवाल काट कर) मैं यह नहीं मानता कि अगर आपकी पिछली फिल्म नहीं चली हो तो आपको काम नहीं मिलना चाहिए। टोनी सधे हुए निर्देशक हैं। तकनीकी रूप से दक्ष हैं। मुझे लगा कि इस फिल्म के साथ वे न्याय करेंगे। हालांकि यह साउथ की फिल्म है। ऐसी फिल्मों के साथ धारणा बन गई है कि वे एक्शन पैक्ड ड्रामा होती है। मुझे रीमेक में थोड़ा चेंज करना था। फिल्म में काफी टर्न और ट्विस्ट है।
- आपके किरदार को हरियाणवी रंग ही क्यों दिया गया?
0 हमने जानबूझ कर ऐसा किया है। ‘बॉस’ के लिए हमें खास किस्म की भाषा, लहजा और तरीका चाहिए था। किसी और भाषा में ‘बॉस’ की ठस नहीं मिलती। हरियाणवी की अपनी खूबी है। किरदार के मिजाज के करीब की यह भाषा लगी। हिंदी फिल्मों में अभी तक नायक को ऐसी भाषा नहीं दी गई है।
- रीयल लाइफ में भी आप बॉस की भूमिकाएं निभाते हैं? परिवार, कंपनी और सेट पर आप अलग-अलग बॉस की भूमिकाओं में होते हैं? रीयल लाइफ के अपने इस रोल के बारे में कुछ बताएं?
0 कहते हैं परिवार के सदस्यों और कंपनी के कर्मचारियों से किसी व्यक्ति के बारे में राय बनायी जा सकती है। उनके साथ उसके संबंधों से उसकी पहचान की जा सकती है। अपने स्टॉफ और घर के सदस्यों के प्रति केयरिंग एटीट्यूड से आप इसे संभाल सकते हैं। यह मैंने अपने पिताजी से सीखा है। मेरा मेकअपमैन पिछले 24 सालों से मेरे साथ है। मेरा ब्वॉय 22 सालों से मेरे साथ है। बॉडीगार्ड 8 सालों से मेरे साथ है। मुझे कभी किसी को निकालना नहीं पड़ा है। मेरे व्यवहार में ह्यूमन टच रहता है। आप उनका ख्याल रखें तो वे भी आपका ख्याल रखते हैं। अच्छे बॉस होने के लिए जरूरी है कि आपके आंख-कान खुले हों और आप सभी के साथ मनुष्य की तरह पेश आएं। मैं उन्हें नौकर या वर्कर नहीं समझता हूं। वे मेरे सहकर्मी हैं।
- पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से आप फिल्म इंडस्ट्री में टिके हैं,जबकि आरोप है कि आप एक ही जैसी फिल्में करते हैं। बतौर एक्टर और निर्माता आपने भिन्नता नहीं दिखायी?
0 ‘स्पेशल 26’ और ‘ओह माई गॉड’ के बाद यह आरोप खत्म हो जाना चाहिए। फिर भी ऐसे आरोपों से मैं बच नहीं पाता। मुझे फिल्मों में काम करना अच्छा लगता है। अपनी समझ से सही फिल्में ही चुनता हूं। कई बार गलती हो जाती है। फिर भी यह एहसास रहता है कि अपनी गलतियों से गिरा हूं। किसी ने धकेला नहीं है। मैंने अभी तक 125 से अधिक फिल्में की हैं, उनमें से 73 हिट रही हैं। इस लिहाज से सक्सेस रेशियो अच्छा कहा जा सकता है। कुछ सेमी हिट भी रही हैं। फ्लॉप भी हैं। समय के मुताबिक मैं अपनी सफल फिल्मों के सिक्वल की हड़बड़ी में नहीं रहता हूं। कभी कोई फिल्म नहीं चलती तो तीन दिनों तक उदासी रहती है। सोमवार से नया काम शुरू हो जाता है। मैं यह कहना चाहूंगा कि अपनी नाकामयाबी जरूर महसूस करें, लेकिन उसे खुद पर इतना हावी न होने दें कि आपकी जिंदगी मुश्किल हो जाए। लड़ते रहेंगे तो हार भी जीत में बदल जाएगी। कई बार मेरी अच्छी फिल्में नहीं चली हैं और साधारण फिल्मों ने जबरदस्त बिजनेस किया है।
- क्या वजह है कि अभी सुपर एक्शन फिल्में ज्यादा पसंद की जा रही हैं?
0 यह तो आप लोग बताएं। मैं ‘खिलाड़ी’ के समय से एक्शन फिल्में कर रहा हूं। फाइट, एक्शन, कॉमेडी, गाने सारे मसालों से भरपूर फिल्में करता रहा हूं। उन फिल्मों में जबरदस्त एक्शन रहता था। जबकि, केबल की सुविधा नहीं थी।
- इन दिनों सभी एक्शन फिल्मों में हवा में लड़ाई होती है। इसे केबल का फायदा कहेंगे या दुरुपयोग?
0 ‘बॉस’ में हवा में लड़ाई नहीं है। हमने मेन टू मेन रखा है। फिल्म के क्लाइमेक्स में रोनित राय के साथ वन टू वन फाइट है। बहुत दिनों के बाद दर्शक पर्दे पर हीरो और विलेन को आमने-सामने देखेंगे। हमने पंजे, मुक्के और दांव-पेंच का सहारा लिया है। आप इसे केबल फ्री फिल्म कह सकते हैं।


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