सिक्स पैक एब और एक्टिंग


-अजय ब्रह्मात्मज

पिछले दिनों आई फिल्म ओम शांति ओम की कामयाबी के बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में शरीर को सुडौल बनाने का नया फैशन चल पड़ा है। संजय दत्त जेल से बाहर आए, तो घोषणा कर दी कि एट पैक एब बनाऊंगा। खबर है कि इन दिनों अजय देवगन भी गुपचुप उसी राह पर निकल पड़े हैं और एक पर्सनल ट्रेनर की देखरेख में वर्जिश भी कर रहे हैं। सुडौल शरीर की इस चिंता से लगने लगा है कि एक्टिंग के लिए शरीर का सुगठित होना जरूरी है। अभी के फैशन को देखकर कहा जा सकता है कि अगर दारा सिंह इन दिनों एक्टिव होते, तो सारी बड़ी फिल्में और मुख्य भूमिकाएं उन्हें ही मिलतीं! हिंदी फिल्मों का इतिहास पलट कर देखें, तो पाएंगे कि पॉपुलर स्टार और एक्टर्स ने कभी शरीर को इतना महत्व नहीं दिया। शाहरुख खान भी ओम शांति ओम के पहले शरीर की वजह से विख्यात नहीं थे। हां, उनकी अदम्य ऊर्जा की चर्चा अवश्य होती थी। के.एल. सहगल और पृथ्वीराज कपूर से लेकर रणबीर कपूर तक को देखें, तो हम पाएंगे कि भारतीय दर्शकों ने कभी स्टार या एक्टर के सुडौल शरीर को अधिक महत्व नहीं दिया। हिंदी फिल्मों के पॉपुलर स्टार अदाओं और अभिनय की वजह से मशहूर हुए। हां, हिंदी फिल्मों के पहले ही-मैन के रूप में धर्मेन्द्र का नाम जरूर लिया जा सकता है। पंजाब से आए इस गठीले और सुंदर नौजवान ने अपनी फिल्मों में शरीर दिखाने से परहेज नहीं किया।
कसरती शरीर, छलकती मांसपेशियां और सुगठित बदन का फैशन हिंदी फिल्मों में हॉलीवुड से ही आया। आर्नोल्ड श्वार्जनेगर की देखादेखी हिंदी फिल्मों के चंद स्टारों ने शरीर पर ध्यान देना शुरू किया। पिछले पंद्रह-बीस सालों में संजय दत्त और सलमान खान इस मामले में अगुआ रहे। बाद में उनकी राह पर चलने वाले दूसरे स्टार भी आए। उन सभी ने यह स्वीकार किया कि संजय दत्त और सलमान खान से प्रेरित होकर ही उन्होंने शरीर पर ध्यान दिया। सन् 2000 में आई कहो ना..प्यार है की रिलीज के बाद रातोंरात स्टार बने रितिक रोशन ने खुले शब्दों में यह कहा था कि मैंने सुडौल शरीर के लिए सलमान खान से टिप्स लिए थे। सलमान इस तथ्य पर गर्व महसूस करते हैं और क्रेडिट लेने से नहीं चूकते कि उन्होंने ही देश के युवकों के बीच जिम कल्चर की चाहत बढ़ाई।
स्वस्थ शरीर हर मनुष्य की जरूरत है। इन दिनों जिम, योगा, कसरत और अन्य उपायों से स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है। करीना कपूर शाकाहारी हो गई हैं और योगा करती हैं। वे जिस सेट पर रहती हैं, वहां मौजूद अन्य कलाकारों को भी योगा के लिए कहती हैं। योगाभ्यास सराहनीय है, लेकिन उसके साथ अन्य सकारात्मक भाव भी मन में आने चाहिए। मन में कलुष हो, तो कोई भी उपाय शरीर को स्वस्थ नहीं रख सकता।
शाहरुख खान ने ओम शांति ओम में सिक्स पैक एब को एक आइटम और आकर्षण के रूप में इस्तेमाल किया। संजय दत्त और सलमान खान अपने सुडौल शरीर से एक्टिंग की अन्य खामियों को छिपाते रहे। अन्य कलाकार भी बेवजह डोले-सोले दिखाते रहे। यह सब अपनी जगह ठीक और दुरुस्त है, लेकिन एक्टिंग से इन सभी विशेषताओं का सीधा रिश्ता नहीं है, क्योंकि एक्टिंग में भाव प्रदर्शन ही जरूरी है। जब इसकी कमी महसूस होती है, तो एक्टर शरीर प्रदर्शन पर आ जाते हैं और फिर सिक्स या एट पैक एब की खबरें फैलाई जाती हैं।

(आप तय करें कि यह एब है कि ऐब है।)

अजय ब्रह्मात्मज के लेखों के लिए लिंक ...

http://in.jagran.yahoo.com/cinemaaza/cinema/darasal.html

Comments

Anonymous said…
मोहे तो ऐब ही लागै है.

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