फिल्‍म समीक्षा : हांटेड

3  डी के साथ विक्रम भट्ट का जादू हांटेड0 हांटेड हिंदी में बनी पहली 3डी फिल्म है। 3ड ी की वजह से दृश्यों में गहराई नजर आने लगती है। मसलन अगर दो दीवारें हों तो आगे और पीछे की दीवार के बीच की दूरी भी समझ में आती है। इसकी वजह से फिल्म देखने का आनंद बढ़ जाता है। 3डी एक तकनीक है, जिसका इस्तेमाल फिल्म शूट करते समय या पोस्ट प्रोडक्शन में भी किया जा सकता है। हांटेड के दृश्यों की कल्पना 3डी तकनीक को ध्यान में रख कर की गई है।

0 हिंदी फिल्मों के दर्शकों के लिए 3 डी का मतलब फिल्म देखते समय यह एहसास होना भी है कि पर्दे से कोई चीज निकली और सीधे उन तक आई। जैसे तीर चलें तो दर्शक बचने के लिए अपना सिर झटक लें। 2डी से 3डी बनाई गई फिल्मों में एक दो ऐसे दृश्य रखे जाते थे। हांटेड में ऐसे कई दृश्य हैं, कई बार तो लगता है कि पर्दे से बढ़ा हाथ हमारे चेहरे को छू लेगा।

0 हांटेड का आनंद लेने के लिए जरूरी है कि आप भूत-प्रेत और आत्माओं के साथ हिंदी फिल्मों पर भी विश्वास करते हों। अगर वैज्ञानिक सोच, तर्क और कार्य-कारण संबंध खोजेंगे तो हॉरर फिल्मों की फंतासी और हांटेड का मजा किरकिरा हो जाएगा। हॉरर फिल्में पूरी तरह से काल्पनिक और अतार्किक होती हैं। कई हिंदी फिल्में भी ऐसी होती हैं।

0 हांटेड में एक भुतहा घर है, जिस में एक दुष्ट आत्मा ने एक मासूम आत्मा को अपने कब्जे में रख लिया है। अस्सी सालों से मासूम आत्मा की चीख सुनाई पड़ती रहती है, जिसकी वजह से उस घर की कीमत घट सकती है या खरीदार भाग सकता है।

0 आधुनिक युवक रेहान को पहले इस कहानी पर विश्वास नहीं होता, लेकिन उस घर में रात बिताने पर वह खुद अलौकिक अनुभवों से गुजरता है। वह इस कहानी की तह में जाता है तो उसे अतीत की सच्ची कहानी मालूम होती है। एक सूफी संत की सलाह पर मासूम आत्मा को मुक्त कराने की जिम्मेदारी वह अपने ऊपर लेता है। यहां से फिल्म में दिलचस्पी बढ़ती है, क्योंकि जीवित इंसान और दुष्ट आत्मा की भिड़ंत का रोमांच जागता है। 0 हांटेड में 3 डी तकनीक के साथ ही डर, ड्रामा और डायरेक्शन का थ्री डी भी है। विक्रम भट्ट की खूबी है कि अपनी हॉरर फिल्मों को वे जुगुप्सा की हद तक नहीं ले जाते हैं। विकृत चेहरे नहीं ले आते और न ही फिल्मों के हत्या और खौफ के वीभत्स दृश्य रखते हैं। इन सभी से परहेज करते हुए दर्शकों के लिए डर क्रिएट करने की चुनौती को विक्रम भट्ट सफलता से निभा ले जाते हैं। हांटेड में 3डी के साथ विक्रम भट्ट के निर्देशन का भी जादू है। इस विधा की फिल्मों में वे निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

0 फिल्मों में व‌र्त्तमान और अतीत का ट्रांजिशन बेझटके होता है। विक्रम भट्ट की 1920 में भी पीरियड क्रिएट किया गया था। हांटेड में भी उन्होंने खूबसूरती के साथ अस्सी साल पहले के समय को क्रिएट किया है। वेशभूषा, गाडि़यां, उपयोग के दूसरे सामानों में पीरियड का ध्यान रखा गया है।

0 3डी से युक्त होने के बावजूद विक्रम भट्ट डराने के पारंपरिक तरीकों का उपयोग करते हैं जैसे चीख, चिल्लाहट, दरवाजों की किर्र-किर्र, बिजली गुल होना, आत्माओं का अचानक प्रकट होना और पाश्‌र्र्व संगीत का तेज होना आदि। हॉरर फिल्मों की यह सब जरूरी मान लिया गया है और विक्रम भट्ट भी उन्हें नहीं छोड़ पाते। क्यों?

0 महाअक्षय चक्रवर्ती ने रेहान की भूमिका को सही ढंग से जीने की कोशिश की है, फिर भी एक्सप्रेशन में अभी वे खुद को नहीं साध सके हैं। बतौर अभिनेता उन्हें और मेहनत करनी होगी। टिया बाजपेयी अवश्य प्रभावित करती हैं। अदृश्य आत्मा के साथ के उनके संघर्ष में की गई मेहनत सफल रही है। इस फिल्म को वास्तव में आरिफ जकारिया और अचिंत कौर ने संभाला है। उन दोनों का काम शानदार है।

0 हॉरर फिल्मों में अमूमन परिचित और मशहूर कलाकार सीधे शब्दों में स्टार नायक-नायिका के तौर पर क्यों नहीं चुने जाते? अगर किसी हॉरर फिल्म के हीरो-हीरोइन पॉपुलर स्टार हो तो दर्शकों का डर और इंटरेस्ट दोनों बढ़ेगा।

0 और हां, हॉरर फिल्मों का संगीत मधुर होता है। हांटेड ने इसका निर्वाह किया है।

रेटिंग- *** तीन स्टार

Comments

Manisha said…
भारत में बनी हिंदी की पहली 3डी फिल्म सामरी थी न कि हान्टेड है।

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