चमकने लगे हैं नए सितारे


-अजय ब्रह्मात्मज
    हिंदी फिल्मों में कुछ सितारे ध्रुवतारे की तरह टिक गए हैं। दशकों से कामयाब इन सितारों की चमक फीकी नहीं पड़ रही है। दर्शक भी इन्हें पसंद करते हैं। वे इनकी फिल्मों के लिए उतावले होते हैं। खानत्रयी (आमिर, सलमान और शाहरुख) का जादू अभी तक बरकरार है। इस साल के आरंभ में सलमान खान की ‘जय हो’ आ चुकी है। हालांकि इस फिल्म ने अच्छा कारोबार नहीं किया, फिर भी कलेक्शन 100 करोड़ से अधिक रहा। 2014 की दूसरी छमाही में आमिर, सलमान और शाहरुख का जलवा दिखेगा। ईद, दीवाली और क्रिसमस के मौके पर आ रही इनकी फिल्में देश के सभी सिनेमाघरों में त्योहार का माहौल बनाएंगी।
    इस बीच पिछले छह महीनों में या यूं कहें कि 2014 की पहली छमाही में कुछ नए सितारों ने अपनी चमक दिखाई है। हिंदी फिल्मों में नवोदित सितारों की ऐसी चमक लंबे समय के बाद नोटिस की जा ही है। ये सभी सितारे अपनी दूसरी-तीसरी फिल्मों से बाजार, इंडस्ट्री और दर्शकों को भरोसा दे रहे हैं कि वे अपनी सामथ्र्य से दर्शकों को एंटरटेन करने के लिए तैयार हैं। इन सितारों की फिल्मों का बिजनेस संतोषजनक है। वे पुराने लोकप्रिय सितारों की परंपरा आगे बढ़ाने के लिए जरूरी गुणों से लैस हैं। यहां तक कि उनमें से कुछ 100 करोड़ क्लब में भी शामिल हो चुके हैं।
    नवोदित सितारों में पहला नाम रणवीर सिंह और परिणीति चोपड़ा का लेना होगा। यशराज फिल्म्स की फिल्मों से आए रणवीर और परिणीति ने दूसरे बैनरों की फिल्मों की कामयाबी से साबित किया है कि वे यहां टिकने वाले हैं। दोनों करिअर के प्रति सीरियस हैं और संभल कर फिल्में चुन रहे हैं। इनके बाद आए कलाकारों में अर्जुन कपूर, सिद्धार्थ मल्होत्रा, वरुण धवन, आदित्य राय कपूर, टाइगर श्रॉफ, कृति सैनन, पत्रलेखा, आलिया भट्ट, श्रद्धा कपूर, वाणी कपूर, तापसी पन्नू, सुशांत सिंह राजपूत, राजकुमार राव, हुमा कुरैशी, स्वरा भास्कर, तमन्ना और साकिब सलीम के नाम लिए जा सकते हैं। अगलेे एक साल में पता चलेगा कि इनमें से कौन अगली कतार में आया और कामयाब त्रयी बना। यह संयोग ही है कि अगली कतार में तीन सितारे ही रहते हैं। फिलहाल सभी ने बाक्स आफिस की कामयाबी से उम्मीदें जगा दी हैं। निर्माता इनमें निवेश करने के लिए तैयार हैं। वे इन्हें फिल्म बिजनेस के विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
    इन सभी ने लोकप्रिय सितारों से होड़ नहीं की है। गौर करें तो इनकी फिल्में पहली छमाही या उस अंतराल में आई हैं, जब बड़े सितारों की फिल्में नहीं आतीं। उन्होंने मिले हुए गैप में ही अपना हुनर दिखा दिया है। कह सकते हैं कि जल्दी ही नवोदित सितारे लोकप्रियता की कमान संभालेंगे। 50 की उम्र छू रहे पहले के सभी सितारे अब प्रौढ़ हो चुके हैं। देर-सबेर ये नए सितारे अपनी चमक से उनकी रोशनी फीकी कर देंगे। हालांकि समय बदल चुका है। अमिताभ बच्चन से प्रौढ़ और वृद्ध सितारों को केंद्र में रख कर कामयाब फिल्में बनाने का प्रयोग चल रहा है। आमिर, शाहरुख और सलमान, सैफ अली खान, अक्षय कुमार और अजय देवगन यथासंभव टिके रहने की कोशिश करेंगे। उनके लिए फिल्में भी लिखी जाएंगी। फिर भी नए सितारों की बढ़ती धमक और धाक ने संकेत दे दिया है कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री नए सितारों के स्वागत के लिए तैयार है। नवोदित सितारे दम-खम से बढ़े आ रहे हैं।



Comments

Popular posts from this blog

लोग मुझे भूल जायेंगे,बाबूजी को याद रखेंगे,क्योंकि उन्होंने साहित्य रचा है -अमिताभ बच्चन

तो शुरू करें

फिल्म समीक्षा: 3 इडियट