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Wednesday, July 22, 2009

इमरान खान से बातचीत

-अजय ब्रह्मात्मज
साल भर के स्टार हो गए हैं इमरान खान। उनकी फिल्म जाने तू या जाने ना पिछले साल 4 जुलाई को रिलीज हुई थी। संयोग से इमरान से यह बातचीत 4 जुलाई को ही हुई। उनसे उनकी ताजा फिल्म लक, स्टारडम और बाकी अनुभवों पर बातचीत हुई। प्रस्तुत हैं उसके अंश..
आपकी फिल्म लक आ रही है। खुद को कितना लकी मानते हैं आप?
तकनीकी रूप से बात करूं, तो मैं लक में यकीन नहीं करता। ऐसी कोई चीज नहीं होती है। तर्क के आधार पर इसे साबित नहीं किया जा सकता। मैं अपनी छोटी जिंदगी को पलटकर देखता हूं, तो पाता हूं कि मेरे साथ हमेशा अच्छा ही होता रहा है। आज सुबह ही मैं एक इंटरव्यू के लिए जा रहा था। जुहू गली से क्रॉस करते समय मेरी गाड़ी से दस फीट आगे एक टहनी गिरी। वह टहनी मेरी गाड़ी पर भी गिर सकती थी। इसी तरह पहले रेल और अब फ्लाइट नहीं छूटती है। मैं लेट भी रहूं, तो मिल जाती है। शायद यही लक है, लेकिन मेरा दिमाग कहता है कि लक जैसी कोई चीज होती ही नहीं है।
क्या हमारी सोच में ही लक और भाग्य पर भरोसा करने की बात शामिल है?
हमलोग आध्यात्मिक किस्म के हैं। हो सकता है उसी वजह से ऐसा हो, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री की बात करें, तो यहां इतना पैसा लगता है, मेहनत लगती है और उसके बाद भी फिल्म नहीं चलती, तो हम भाग्य को कोसकर संतोष कर लेते हैं। कामयाबी पर तो हर व्यक्ति का दावा होता है। असफलता किस्मत से जोड़ दी जाती है।
फिर क्या लक जैसी कोई चीज होती है?
जो यकीन करते हैं, उनके लिए होगी। मैं नहीं मानता कि भाग्य से मेरे करियर में कोई बदलाव आएगा। उसके लिए मुझे मेहनत करनी ही होगी।
आपने दीवाली पर ताश खेला होगा या फिर कैसिनो में दांव लगाए होंगे? कितने लकी रहे आप?
अगर जीतने से लक को जोड़ेंगे, तो मैं अनलकी हूं। वैसे भी मुझे ताश और कैसिनो आदि का शौक नहीं है। मैं दांव नहीं लगाता। मैंने कभी लाटरी का टिकट भी नहीं खरीदा है।
आप एक साल से स्टार हैं। इस एक साल में क्या बदला है आपके लिए?
ज्यादा कुछ नहीं, लेकिन फर्क मेरे जीवन में भी आया है। मेरे पास एक बड़ी और महंगी गाड़ी आ गई है। मेरा बैंक बैलेंस बढ़ गया है। मैं पहले की तरह ही कम खर्च करता हूं। मेरे वही दोस्त हैं। मैं उनके साथ ही समय बिताता हूं।
आप पहले से अधिक मैच्योर हो गए हैं। बात करने की कला आ गई है और प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के जवाब देने में स्मार्ट हो गए हैं?
थैंक्स.., अगर पिछले प्रेस कॉन्फ्रेंस की बात कर रहे हैं, तो उसकी जिम्मेदारी अचानक मेरे कंधों पर आ गई थी। संजय दत्त किसी वजह से नहीं आ सके। अंतिम समय में उनका आना कैंसल हुआ, तो मुझ पर बोझ डाल दिया गया। मैंने कोशिश की कि प्रेस कॉन्फ्रेंस अच्छा और लाइव रहे। थैंक्स कि सब ठीक से हो गया।
क्या आप को नहीं लगता कि आमिर खान की वजह से आप आसानी से स्टार बन गए?
मैं आपसे थोड़ा सहमत और थोड़ा असहमत हूं। मामू से मुझे मदद मिली, लेकिन लोगों ने इमरान खान को स्वीकार किया। भारतीय परंपरा में हम परिवार के सदस्यों को.., उनकी विरासत को स्वीकार करते हैं। फिल्मों के मशहूर परिवारों को देख लें। राजनीति और इंडस्ट्री में भी ऐसा ही है। आरंभिक स्वीकृति मिल सकती है, लेकिन उसके बाद परफॉर्म करना होता है। अगर मेरी फिल्में लगातार फ्लॉप हों और काम भी लोगों को पसंद न आए, तो मुझे कोई भी नहीं बचा सकता।
क्या ऐसा इसलिए है कि हमारा समाज अभी तक सामंती मूल्यों में विश्वास करता है और हम अ‌र्द्ध शिक्षित हैं?
यह एक वजह हो सकती है, लेकिन परिवारों के प्रति हमारा भरोसा जागता है। पूंजीवादी समाज में विचार और राजनीति मूल्यों से लगाव रहता है। हम भारत में वंश, परिवार और विरासत पर जोर देते हैं।
लक की हीरोइन श्रुति हासन के बारे में बताएंगे?
वह मेरी बचपन की दोस्त है। हमलोग स्कूल में एक-दूसरे की मदद करते थे। एक-दूसरे के सहारे परिवार में झूठ बोलकर बच निकलते थे। श्रुति बेहद प्रतिभाशाली ऐक्ट्रेस और सिंगर हैं। उनकी गायन प्रतिभा से में पहले से परिचित हूं। एक्टिंग वे पहली बार कर रही हैं। उनमें कलाकार जैसा आत्मविश्वास है। नए कलाकार के लिए यह फिल्म उतनी आसान नहीं कही जाएगी। उन्होंने पूरे दिल से अपना काम किया है।
डैनी और संजय दत्त जैसे सीनियर कलाकारों के साथ काम करते समय थोड़ा सावधान रहना पड़ा होगा?
संजय दत्त के साथ तो काम कर चुका हूं। डैनी साहब के साथ पहली बार काम किया है। मैं उनका फैन हो गया। उनका व्यक्तित्व बहुत शानदार है। वे सेट पर एकदम सहज रहते हैं। उनके अनुभव और साथ से मैंने बहुत कुछ सीखा।
..और सोहम शाह?
सोहम तो मेरे हमउम्र हैं साथ हैं। उन्होंने जब इस फिल्म के बारे में विस्तार से बताया था, तब मैं सोच में पड़ गया था कि क्या वे यह सब सही-सही कर पाएंगे? फिल्म का तकनीकी पक्ष बहुत स्ट्रॉन्ग है। यह फिल्म किसी विदेशी फिल्म की नकल नहीं है।

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