फिल्म कैसे बनती है - ख्वाजा अहमद अब्बास


हर बार जब तुम अच्छी फिल्म देखने के लिए टिकट खरीदते हो तो तुम अच्छी फिल्मों के निर्माण में सहायक होते हो और जब बुरी फिल्म का टिकट खरीदते हो तो बुरी फिल्मों को बढ़ावा देते हो - ख्वाजा अहमद अब्बास

ख्वाजा अहमद अब्बास ने यह बात अ।ज से तीस साल पहले 'फिल्म कैसे बनती है' में लिखी. बच्चों को फिल्म निर्माण की जानकारी देने के उद्देश्य से लिखी गयी यह किताब नेशनल बुक ट्रस्ट ने छापी थी. अभी तक इसके बारह संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं. पिछली बार दिल्ली प्रवास में चवन्नी ने यह पुस्तक हासिल की. सिर्फ 12 रूपए मूल्य की यह पुस्तक सभी सिनेप्रेमियों को पढ़नी चाहिए. और हां, चवन्नी महसूस करता है कि इसे रिफ्रेश या अद्यतन करने की जरूत है. इस बीच सिनेमा का तकनीकी विकास बहुत तेजी से हुअ। है. विकास के इन तत्वों को जोड़कर पुस्तक को अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है.

इस पुस्तक के अध्याय हैं -

1. पर्दे का जादू
2. चलचित्र जो चलते नहीं
3. एक समय की बात है
4. अलादीन और उसका जादुई चिराग
5. सागर तट पर पिकनिक
6. छद्म गायक
7. फिल्म का संपादन
8. लाखों के लिए संगीत
9. दुल्हन का श्रृंगार
10. सिनेमा का गणित
11. फिल्म कैसे देखें

ऊपर चवन्नी ने जो उद्धरण किया है, वह इस पुस्तक के ग्यारहवें अध्याय 'फिल्म कैसे देखें' से लिया गया है.

Khwaja Ahmad Abbas was born in 1914 in Panipat, Haryana and graduated from Aligarh Muslim University in 1933. He began his career as a journalist, writing for a newspaper based in New Delhi called the Aligargh Opinion, while studying for a law degree which he received in 1935. He worked as a film critic for the Bombay Chronicle from 1935-1947, and in 1941 he began writing the longest running political column in India's history known as The Last Page. K. A. Abbas was also a prolific novelist and screenwriter. In 1951, he founded his own production company, which became known for producing films with socially relevant themes.

Comments

Sajeev said…
चवन्नी sir आपका ब्लॉग मुझे बहुत अच्छा लगा विशेषकर इसलिए की आप मेरे पसंद के विषय पर लिखते हैं, आपका अंदाज़े बयाँ भी बहुत अच्छा है, यह पुस्तक मैंने भी पढी है, पर आप सही कहते हैं आज भी इस तरह की पुस्तकें लिखी जानी चाहिए समय और तकनीक दोनों बहुत बदल चुकी हैं. मेरा मेल है sajeevsarathie@gmail.com
Anonymous said…
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ख्वाजा अहमद अब्बास जी की लिखी एक किताब - गेहूँ और गुलाब कल ही पढी है। उनके बारे में कुछ और जानने की इच्छा से खंगाला तो नेट पर आपका यह पोस्ट पकड में आया। बढिया जानकारी मिली।

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